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Wednesday, October 20, 2010

दुःख का अहसास


दुःख .........


सायद आप जानना चाहते हैं की दुःख क्या है .......? क्योंकि जिन्दगी हमें कभी कभी ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है जब हम दुःख का एहसास करते हैं तब यह सारी कायनात हमें बेरंग नजर आने लगती है हालाँकि हममे से हर कोई इस शब्द और इसके प्रभाव से वाकिफ है क्योंकि यह कई रूपों में हमें मिलते हैं फिर भी दुःख क्या होता है..............? मेरी नजरों में किसी के प्रति अटूट और निश्छल प्रेम का खंडन होना ही हमारे दुखों का कारन होता है कभी आप ऐसा करके देखना तो सायद आप भी दुःख को आप बहुत करीब से देख पाएंगे

कभी किसी को चाहना और चाहते ही रहना दिन भर उसको ही सोचते रहना अपने हाथो की लकीरों में उसके नाम को तरसना और जब कभी वो इन रियाजतो का हिसाब मागने को सामने आये तो आप उसका हाथ थम लेना और अगर वो कुछ कहे तो मुस्कुराकर अनजान बन जाना और जब वो मायूश होकर लौट जाए तो अपने अन्दर झाकना और खुद से पूछना तब तुम्हारा दिल तुम्हे बताएगा की दुःख किसे कहते है और दुःख क्या होता है .................तिलक

3 comments:

  1. sahi kaha... par kabhi kabhi kuchh dukhon ka ahsaas hame hona chahiye... wo hame hamari galtiyon ka ahsaas karate hai...

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  2. तिलक जी बहुत शानदार लिखा है आपने दुःख पर.
    दुःख और दुःख के दर्द की चीखें तो होती हैं पर आवाजें नहीं. यह नायब चीज़ है दुःख भी कि हम सुख की अनुभूति भी इसके बिना नहीं कर पाते.
    जारी रहें. शुभकामनाएं.

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  3. Wah Tilak Ji Wah aapne to Jeene ka matlab sikha diya agar har koi isi tarah dukh ke matlab ko samajh le to mera manana hai ki phir hame dukho se darne ke jarurat nahi padegi

    Dhannayabaad aur aapko dhersari shubhkamnai

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